Chanakya Niti in hindi , चाणक्य नीति की महत्वपूर्ण बातें

Chanakya niti में लिखीं हुई मुख्य बातें

Chanakya अर्धशास्त्र के एक महान ज्ञानी थे और उनका कोई भी मुक़ाबला नहीं कर पाता था, उन्होंने अर्थशास्त्र से लेकर सारी पढ़ाई करी थी और उनके शिष्य चंद्रगुप्त मौर्य काफी ज्यादा समझदार थे, चंद्रगुप्त मौर्य को जीवन जीने की सारी सुविधाएं पता थी, क्योंकि चाणक्य ने उनसे कहा था कि- विष दो, लेकिन विश्वासघात ना दो, क्योंकि अगर हमारे साथ विश्वासघात होता है, तो हमारा दिल टूट जाता है और वह कभी नहीं जुड़ता, इसलिए विश्वासघात से बड़ा दुश्मन, इस दुनिया में कोई नहीं है, इससे बचने के लिए हमें खुद पर काबू करना होता है।
आचार्य चाणक्य को प्राचीन इतिहास के महानतम शिक्षकों और विद्वानों में से एक समझा जाता है. चाणक्य ने कई ऐसी बातें बताई हैं, जिन्हें अगर जीवन में अपनाया जाए तो जीवन सफल हो सकता है. चाणक्य नीतियां सदियों पुरानी होने के बावजूद आज की जीवनशैली में आसानी से लागू की जा सकती है. आज हम आपको ऐसे लोगों के बारे में बताने जा रहे हैं जो आचार्य चाणक्य की नीति के अनुसार कभी धनवान नहीं हो सकते हैं. तो आइए जानते हैं.

Chanakya द्वारा कही गई महत्वपूर्ण बातें

  • दुष्ट इंसान की मीठी बातों पर कभी भरोसा मत करो, वह अपना मूल स्वभाव कभी नहीं छोड़ सकता। जैसे शेर कभी ऐसा नहीं छोड़ सकता है।

  • सत्य का सहारा लेकर, हम किसी भी चीज को अपना सकते हैं, लेकिन झूठ का सहारा लेकर, हम उस चीज में फंस जाते हैं और वह हमारी कभी नहीं हो पाती है, इसलिए सत्य का हमेशा साथ देना चाहिए, सत्य के साथ तो ईश्वर भी खड़ा होता है, लेकिन झूठ के साथ हैवान ही खड़े होते हैं।

  • अच्छे कार्य जीवन को महान बनाते हैं। यह मत भूले की जीवन स्थाई है। इसलिए जीवन के हर क्षण का उपयोग किया जाना जरूरी है। मौत आ जाएगी तो फिर कुछ भी ना रहेगा ना या शरीर ना कल्पना ना आशा हर चीज मौत के साथ दम तोड़ देगी।

  • शिक्षा इंसान की सबसे अच्छी मित्र होती है एक शिक्षित इंसान हर जगह सम्मान पाता है शिक्षा सुंदरता को भी पराजित कर सकती है

  • लालच इंसान के स्वभाव को पूरा बदल कर रख देता है, अगर लालच आ गया, तो समझ लीजिए, आप बर्बाद हैं, लालच जीवन में किसी भी चीज से पूर्ति नहीं कर पाता है, क्योंकि लालजी लोग हमेशा ज्यादा की आशा रखते हैं, जितना है, उसमें खुश नहीं रहते और खुशी पाने के लिए, वह किसी भी तरीके को अपना लेते हैं, इसलिए लालच से दूर रहना चाहिए।

  • प्यार एक ऐसा बंधन है, जिसमें बंधने के बाद इंसान पूरी तरह पागल सा हो जाता है, वह सिर्फ प्यार के बारे में ही सोचता है और प्रियतम से बात करके काफी खुश होता है, अगर सामने वाला भी आपसे उतना ही प्यार करता है, तो प्यार सच्चा है, लेकिन प्यार नहीं करता तो, आपको धोखा मिलना ही है।

  • अपने ज्ञान पर कभी भी घमंड नहीं करना चाहिए, क्योंकि इस दुनिया में बहुत ज्ञान है, जितना लिया जा सकता है, उतना लीजिए और जान एक अर्थशास्त्र है, जिसको जानकर हम किसी भी व्यक्ति की भावनाओं को समझ सकते हैं, ज्ञान के द्वारा ही हम झूठ मन से बाहर निकलते हैं, अगर व्यक्ति के पास ज्ञान है, तो वह एक अच्छा प्राणी बन सकता है, लेकिन ज्ञान के बिना कुछ भी नहीं है।।

  • अपने रहस्यों को किसी पर भी उजागर मत करें या आदत स्वयं के लिए घातक सिद्ध हो सकती है।

  • इंसान की जिंदगी में एक कमजोरी जरूर होती है, लेकिन अगर वह कमजोरी खुद तक ही सीमित रखनी चाहिए, किसी को बताना नहीं चाहिए, क्योंकि घर से बाहर बात जाते ही मजाक उड़ने लगता है और आप का मनोबल टूटता है, इसलिए कमजोरी को अपनी ताकत बनाइए और उस पर अमल करिए।

  • राजा ऐसा व्यक्ति होता है जिसके अधीन सेना, मंत्री और अन्य राजा रहते हैं। इसके बावजूद उसे अत्यधिक शक्तिशाली होना चाहिए क्योंकि शक्तिहीन व्यक्ति कभी राजा हो ही नहीं सकता। दूसरों पर अपना शासन स्थापित करने के लिए उन से अधिक ताकतवर होना अवश्यक है। राजा जितना शक्तिशाली होगा उतना ही अच्छा शासक रहता है।

Chanakya Niti मे लिखे गई मुख्य बातें

  • ज्ञान ऐसी शक्ति है जिसे न तो कोई चुरा सकता है और न ही कोई छिन सकता है। ब्राह्मण, संत, महात्मा या ज्ञानी व्यक्ति की सबसे बड़ी शक्ति उसका ज्ञान है। वह अपने ज्ञान के बल पर किसी को भी अपने वश में कर सकता है। ईश्वर और जीवन से संबंधित ज्ञान ही किसी भी ब्राह्मण की सबसे बड़ी शक्ति हो सकता है।

  • जवान और खूबसूरत स्त्रियां अपनी मीठि बोली से दूसरों को अपनी ओर आकर्षित करके अपने मनचाहे काम करवा लेती हैं। पुरुषों के लिए किसी भी स्त्री की उपलब्धि को कम कर आंकने का सबसे अच्छा तरीका यही होता है कि उसकी उपलब्धि के लिए उसके औरत होने को ही कारण बताएं। खास कर यदि वह औरत जवान और खूबसूरत हो तो फिर बात ही क्या ?

  • आचार्य Chanakya niti के मुाताबिक मित्र को अच्छे काम में लगा देना चाहिए, ताकि वो आपको समय पर अच्छी सलाह दे सके। वो कहते हैं कि मित्र को मेहनत और ईमानदारी वाले काम सौंप देने चाहिए। इससे वो अपना जीवन सुधार सकता है। याद रखें दोस्त सफल होगा तो वो आपके लिए भी सफलता के रास्ते खोजने में मददगार होगा।

  • वो कहते हैं कि संतान की अच्छी परवरिश बेहद जरूरी है, इसलिए पुत्र को पढ़ाई-लिखाई में लगा देना चाहिए। इससे संतान को सफलता का सही मार्ग मिलता है और वो बुद्धिमान बनता है। यही बुद्धिमता उसे लक्ष्य प्राप्ति की ओर ले जाती है।

  • चाणक्य कहते हैं कि दुश्मन को बुराइयों में लगा देना चाहिए, यही व्यावहारिकता है और समय की मांग भी है। वो कहते हैं कि दुश्मन को बुरी आदतों का शिकार बना देना चाहिए ताकि वह उसी में उलझकर रह जाए और आपको अनावश्यक रूप से परेशान न करे।

  • हर व्यक्ति का एक मजबूत और कमजोर पक्ष होता है। इस कमजोर पक्ष को कभी लोगों के सामने जाहिर नहीं होने देना चाहिए। इससे व्यक्ति दूसरों की नजरों में कमजोर बनता है। लोग उसकी इस कमजोरी का फायदा उठाने की कोशिश कर सकते हैं।

  • चाणक्य का मानना है कि व्यक्ति की कमजोरियां जब उजागर हो जाती है तो स्वार्थी लोग इसका फायदा उठाने में जुट जाते हैं जिस कारण व्यक्ति को मुसीबतों का सामना भी करना पड़ता है। इसलिए इन बातों को हमेशा में ध्यान में रखना चाहिए।

  • व्यक्ति के जीवन में कई बार ऐसे अवसर आते हैं जब वह दुखी होता है। इस दुख के पलों को लोगों से छिपाना चाहिए। दुनिया के सामने अपने दुखों को जाहिर नहीं करना चाहिए। इससे लोग आपको कमजोर समझने लगेगें। जो बाद में आपके कार्यों में बाधा के रुप में सामने आएगा।

  • चाणक्य का मानना है कि व्यक्ति की कमजोरियां जब उजागर हो जाती है तो स्वार्थी लोग इसका फायदा उठाने में जुट जाते हैं जिस कारण व्यक्ति को मुसीबतों का सामना भी करना पड़ता है। इसलिए इन बातों को हमेशा में ध्यान में रखना चाहिए।

  • व्यक्ति के जीवन में कई बार ऐसे अवसर आते हैं जब वह दुखी होता है। इस दुख के पलों को लोगों से छिपाना चाहिए। दुनिया के सामने अपने दुखों को जाहिर नहीं करना चाहिए। इससे लोग आपको कमजोर समझने लगेगें। जो बाद में आपके कार्यों में बाधा के रुप में सामने आएगा।

  • चाणक्य के मुताबिक पैसे का इस्तेमाल साधन के रूप में करना चाहिए। बुरे कर्मों द्वारा प्राप्त हुआ पैसा किसी काम का नहीं होता। जिस धन के लिए दुश्मनों के आगे-पीछे घूमना पड़े, धर्म त्यागना पड़े, उस पैसे से लगाव नहीं रखना चाहिए।

  • चाणक्य की नीति के मुताबिक हमें रहने के लिए ऐसी जगह का चुनाव करना चाहिए जहां रोजगार और जीविका के लिए भरपूर साधन हो। ऐसी जगह रहने से व्यक्ति को कभी खाली हाथ नहीं रहना पड़ता।

  • चाणक्य कहते हैं कि इंसान के जीवन में सफल होने के लिए और धन की प्राप्ति के लिए लक्ष्य का निर्धारित होना आवश्यक है। ऐसा नहीं होने पर इंसान धन की प्राप्ति नहीं कर पाता और सफलता कोसो दूर चली जाती है। साथ ही कभी भी अपनी योजनाओं के बारे में किसी और को नहीं बताना चाहिए।

  • चाणक्य कहते हैं विकट परिस्थिति के लिए धन का संचय जरूरी है लेकिन सारा का सारा पैसा बचाकर रखना मूर्खता है। धन को बचाने का सबसे अच्छा तरीका उसके ज्यादा से ज्यादा हिस्से को सही जगह खर्च करना होता है। जिस प्रकार तालाब या बर्तन में रखा पानी एक समय बाद खराब हो जाता है वैसे ही बिना प्रयोग वाला धन भी बर्बाद हो जाता है।

  • स्त्रियों के पीछे भागने वाला इंसान बर्बाद हो जाता है। चाणक्य कहते हैं कि ऐसा व्यक्ति हमेशा अपमानित होता रहता है। समाज उसे बुरी नजर से देखता है। ऐसा इंसान खुद के लिए ही सबसे बड़ा मुसीबत हो जाता है।

  • धैर्य को मनुष्य के लिए जरूरी गुणों में शामिल किया गया है। चाणक्य के मुताबिक धैर्यवान व्यक्ति जीवन के सफर में सफलता को प्राप्त करते हैं। लेकिन धैर्य न रखनेवाला व्यक्ति एक समय के बाद नष्ट हो जाता है।

आप आचार्य चाणक्य की निति पढ़ रहे हैं

  • झगड़ालु स्वभाव के लोग खुद ही अपने जीवन को नष्ट कर लेते हैं। ऐसे व्यक्ति हर मौके पर खुद को अकेले पाते हैं और एक समय के बाद बर्बाद हो जाते हैं।

  • चाणक्य के अनुसार बुरे वक्त में व्यक्ति को सकारात्मक सोचना चाहिए हर काली रात के बाद उजला सबेरा होता है उसी प्रकार से बुरा समय गुजर जाने के बाद अच्छा समय आता है।

  • बुरा समय आता है, इससे कोई भी नहीं बच सका है। प्रकृति का इंसाफ सभी के लिए बराबर है। जो लोग समझते हैं कि वह संपंन हैं। संसाधनों से युक्त हैं उन्हें भी बुरा समय देखना पड़ता है। बुरे वक्त में उम्मीद की किरण को नहीं छोड़ना चाहिए। यही वह किरण है जिससे जीवन में प्रकाश होगा।

  • खराब समय को आसानी से गुजारा जा सकता है अगर प्रेम और सद्भाव की भावना बनी रही। प्रेम ही ऐसी शक्ति है जो बुरे से बुरे वक्त की पीड़ा को कम कर देता है। प्रेम बुरे वक्त से लड़ने का सबसे बड़ा अस्त्र है। इसे किसी भी सूरत में त्यागना नहीं चाहिए।

  • बुरा समय आए तो एक दूसरे का सहारा बनना चाहिए। आपके आसपास के लोग उनसे जुड़ी चीजें यदि सुरक्षित हैं तो बुरा वक्त जल्द गुजर जाता है। बुरे वक्त में ही इंसान की पहचान होती है। कौन भाई है कौन मित्र और रिश्तेदार हैं सभी की पहचान बुरे वक्त में ही तो होती है। इसलिए बुरे वक्त में सभी को एक रहना चाहिए।

  • Chanakya niti के अनुसार सफलता की अभिलाषा हर व्यक्ति के मन में होती है। लेकिन मन में सोच लेने से व्यक्ति को सफलता प्राप्त नहीं होती है। सफल होने के लिए पहली शर्त परिश्रम है। चाणक्य ने सफल होने के लिए कुछ गुण बताए हैं। ये गुण हर व्यक्ति के भीतर मौजूद होते हैं लेकिन ये गुण जागृत न होे पाने के कारण व्यक्ति सफलता के सोपान से वंचित ही रह जाता है।

  • चाणक्य नीति के अनुसार व्यक्ति को जीवन में यदि सफलता प्राप्त करनी है तो सबसे पहले लक्ष्य का निर्धारण करना बहुत ही जरुरी है। लक्ष्य निर्धारित किए बिना सफलता हासिल करना एक चुनौती है। चाणक्य ने इसके लिए कुछ गुण बताए हैं उनको जरुर जान लेना चाहिए।

  • चाणक्य के अनुसार व्यक्ति को अपनी आलोचना से बिल्कूल भी नहीं घबराना चाहिए। जो व्यक्ति आलोचना से मुंह चुराता है वह अपनी गलतियों को छिपाने की कोशिश करता है। आलोचना व्यक्तिओं को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती हैं।

  • किसी भी कार्य में सफलता प्राप्त करने के जीवन में अनुशासन का बहुत ही महत्व होता है। जीवन में जबतक अनुशासन नहीं होगा किसी भी लक्ष्य को प्राप्त करने में संकट बना रहेगा।अनुशासन से सफलता के रास्ते खुलते हैं।

  • किसी भी कार्य को करने के लिए उचित मार्गदर्शन अवश्य लेना चाहिए। इससे कार्य को समझने और उसे पूरा करने में मदद मिलती है। मार्गदर्शन लेते समय सावधानी भी बरतनी चाहिए। मार्गदर्शन सदैव उचित और योग्य व्यक्ति से ही लेना चाहिए।

  • किसी भी कार्य को करने के लिए समय की सीमा तय करना बहुत ही जरुरी होता है। यही समय प्रबंधन है। कार्य को हाथ में लेने के बाद समय सीमा तय कर लेनी चाहिए इसके बाद चरणबद्ध तरीके से कार्य को पूर्ण करना चाहिए।

  • किसी भी कार्य को करने के लिए मन में प्रसन्नता के भाव होना बहुत ही जरुरी है। प्रसन्नता के भाव जबतक मन में नहीं होंगे तब तक सफलता दूर रहती है। क्योंकि मन अच्छा होने पर ही मस्तिष्क पूर्ण कार्य करता है।

  • कार्य को करने के लिए आत्मविश्वास का होना बहुत ही जरुरी है। आतमविश्वास से ही सफलता को प्राप्त किया जा सकता है। आत्मविश्वास शिक्षा, ज्ञान और अनुभव से उत्पन्न होता है।

  • संकट आने पर सभी एक जुट हो जाना चाहिए। संकट से लड़ने के लिए भी एकता की जरुरत पड़ती है। जब सभी का सहयोग मिलता है तभी संकट दूर होता है।

Chanakya Niti in Hindi

  • लक्ष्मी को चंचल माना गया है। आचार्य चाणक्य के मुताबिक जो व्यक्ति पैसे को पानी की तरह बहाता है और बुरे समय के लिए बचाकर नहीं रखता वो मूर्ख कहलाता है, उसे एक समय के बाद परेशानी का सामना करना पड़ता है। वहीं, जो व्यक्ति कठिन समय के लिए पैसे बचाकर रखता है वो बुद्धिमान कहलाता है। भोग-विलासिता के कारण पैसों को बिना सोचे खर्च करने वाला व्यक्ति बुरे समय में हाथ मलता रह जाता है।

  • चाणक्य का मानना है कि व्यक्ति की कमजोरियां जब उजागर हो जाती है तो स्वार्थी लोग इसका फायदा उठाने में जुट जाते हैं जिस कारण व्यक्ति को मुसीबतों का सामना भी करना पड़ता है। इसलिए इन बातों को हमेशा में ध्यान में रखना चाहिए।

  • व्यक्ति के जीवन में कई बार ऐसे अवसर आते हैं जब वह दुखी होता है। इस दुख के पलों को लोगों से छिपाना चाहिए। दुनिया के सामने अपने दुखों को जाहिर नहीं करना चाहिए। इससे लोग आपको कमजोर समझने लगेगें। जो बाद में आपके कार्यों में बाधा के रुप में सामने आएगा।

  • व्यक्ति को धन के लिए लालच नहीं करना चाहिए। आर्चाय चाणक्य की नीतियों के अनुसार धन- दौलत से जीवन में संतुलन बनता है। उतना धन हमारे लिए आवश्यक है, जितने में हमारी सभी जरूरतें पूरी हो जाएं। लालच करने से कोई फायदा नहीं होता है। अधिक लालच के चक्कर में जो हमारे पास जो धन होता है, हम उसका भी सही उपयोग नहीं कर पाते हैं।

  • व्यक्ति को सोच-समझकर धन का खर्च करना चाहिए। आर्चाय चाणक्य की नीतियों के अनुसार धन का खर्च आवश्यकता के अनुसार ही होना चाहिए। सोच-समझकर धन का खर्च करने में ही समझदारी है। भोग विलासता में धन खर्च नहीं करना चाहिए।

  • चाणक्य नीति में पत्नी को धन से ऊपर बताते हैं और कहते हैं कि पत्नी के जीवन का सवाल हो तो वहां धन की परवाह नहीं करनी चाहिए। स्त्री परिवार की मान-मर्यादा होती है, उसी से व्यक्ति की अपनी मान-मर्यादा होती है। वही चली गई तो धन व जीवन किस काम का रह जाएगा।

  • साथ ही चाणक्य कहते हैं कि जब मनुष्य के स्वयं की जान पर बन आए तो धन और स्त्री की चिंता छोड़कर अपनी रक्षा करनी चाहिए। अपनी रक्षा होगी तो अन्य सबकी रक्षा की जा सकती है।

  • चाणक्य ने अपनी नियति मे में गायत्री मंत्र को सबसे बड़ा मंत्र बताया है। इस मंत्र के जाप से व्यक्ति को शक्ति, आयु, प्राण, कीर्ति और धन की प्राप्ति होती है। कहा जाता है कि यह मंत्र अन्य सभी मंत्रों में सर्वशक्तिमान है।

  • चाणक्य कहते हैं कि संकट की घड़ी में धन यानी पैसे की रक्षा करनी चाहिए और धन से भी ज्यादा व पहले पत्नी की रक्षा करनी चाहिए। लेकिन जब सवाल खुद के अस्तित्व का हो और इसके लिए पत्नी और धन का बलिदान भी करना पड़े तो कर देना चाहिए चूकना नहीं चाहिए।

  • आचार्य ने अपनी चाणक्य नीति में मनुष्य को श्रेष्ठ बनाने के लिए बहुत सी बातें बताई हैं। चाणक्य के अनुसार धन और पद से किसी भी व्यक्ति को सफल नहीं माना जाता है। सफल वही है जो समाज में अनुकरणीय और पुज्यनीय हो। यानि सफल वही है जो जीवित और मृत्यु के बाद भी लोगों को याद आए। लोग उसके योगदान, प्रतिभा, कार्यों की चर्चा करें।

  • सम्मान प्राप्त करने की पहली शर्त है कि सामने वाले को भी सम्मान प्रदान किया जाए। जो लोग दूसरों को सम्मान देते हैं वे ही समाज में सम्मान के हकदार होते हैं। जो दूसरों को लज्जित करने में गौरव महसूस करता है उसे जीवन में कभी सम्मान प्राप्त नहीं होता है।

  • सम्मान प्राप्त करने की पहली शर्त है कि सामने वाले को भी सम्मान प्रदान किया जाए। जो लोग दूसरों को सम्मान देते हैं वे ही समाज में सम्मान के हकदार होते हैं। जो दूसरों को लज्जित करने में गौरव महसूस करता है उसे जीवन में कभी सम्मान प्राप्त नहीं होता है।

  • ज्ञान का प्रयोग जो लोग समाजहित में प्रयोग करते हैं वे समाज में अनुकरणीय होते हैं। ऐसे लोगों की समाज में विशेष सम्मान प्रदान किया जाता है। ज्ञान का असली अर्थ लोगों को जागरुक करना है। जो सही और गलत का भेद बताए वही ज्ञान है।

  • जो व्यक्ति जीवन में सत्य का मार्ग अपनाता है उसे सम्मान प्राप्त होता है। सत्य का मार्ग कठिन है। इस पर चलना आसान नहीं है। लेकिन जब व्यक्ति इस रास्ते पर निकल पड़ता है तो कुछ समय बाद वो लोग भी सराहना करने लगते हैं जो कल तक उसकी आलोचना करते थे। सत्य का मार्ग ही व्यक्ति को सर्वोच्चता के शिखर पर पहंचाता है।

  • व्यक्ति महान अपने गुणों और कर्मों से बनता है। जो व्यक्ति दी गई जिम्मेदारियों पर खतरा उतरता है। पूरी ईमानदारी से जिम्मेदारियों को पूर्ण करता है। वह व्यक्ति हर जगह सम्मान का पात्र होता है।

  • चाणक्य विज्ञान के एक महान ज्ञानी थे और उनका कोई भी मुकबला नहीं कर पाता था, चाणक्य अर्थशास्त्र से लेकर सारी पढ़ाई कर चुके थे और उनके शिष्य चंद्रगुप्त मौर्य काफी ज्यादा समझदार थे, चाण्क्य अपनी एक बात पर हमेशा अटल रहते थे - कि किसी को विष दो पर विश्वासघात नही, जीवन को सच्चाई पर जीना चाहिए, बुराई पर नही।

  • सत्य का सहारा लेकर, हम किसी भी चीज को अपना बना सकते हैं, लेकिन झूठ का सहारा लेकर हम उस चीज में फंस जाते हैं और वह हमारी कभी नहीं हो पाती है, इसलिए सत्य का हमेशा साथ देना चाहिए, सत्य के साथ तो ईश्वर भी खड़ा होता है, लेकिन झूठ के साथ हैवान ही खड़े होते हैं।

  • प्यार एक ऐसा बंधन है, जिसमें बढ़ने के बाद इंसान पूरी तरह पागल सा हो जाता है, वह सिर्फ उसके बारे में ही सोचता है और उनसे बात करके काफी खुश होता है, अगर सामने वाला भी आपसे उतना ही प्यार करता है, तो प्यार सच्चा है, लेकिन प्यार नहीं करता, तो आपको धोखा मिलना ही है।

  • इंसान के स्वभाव को पूरा बदल कर रख देता है, अगर लालच आ गया, तो समझ लीजिए आप बर्बाद हैं, लालच जीवन में किसी भी चीज से पूर्ति नहीं कर पाता है, क्योंकि लालजी लोग हमेशा ज्यादा की आशा रखते हैं, किसी भी चीज़ से सन्तुष्ट नही रहते और कुछ पाने के लिए, वह किसी भी तरीके को अपना लेते हैं, इसलिए लालच से दूर रहना चाहिए।

  • अपने ज्ञान पर कभी भी घमंड नहीं करना चाहिए, क्योंकि इस दुनिया में बहुत ज्ञान है, जितना लिया जा सकता है, उतना लीजिए और जान एक अर्थशास्त्र है, जिसको जानकर हम किसी भी व्यक्ति की भावनाओं को समझ सकते हैं, और ज्ञान के द्वारा ही हम झूठ से बाहर निकलते हैं।
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