कर्म और सब्र अध्यात्मिक कहानी

Hindi-spiritual-Story

एक गुब्बारें बेंचने वाला आदमी, ये गुब्बारे कितने के 20 रूपयें के साहब, चल भाग यहाँ से लूटता हैं, और वो इंसान उसे धकेल देता हैं, दिन भर अपनी मेहनत के बाद, जब जेब टटोलता हैं, और कम पैंसे देख उदास होकर ईश्वर से कहने लगता हैं आज फिर इतने कम पैंसे, मैं अपने बीबी और बच्चों को क्या खिलाऊंगा, और लोग मुझे झूठा कहते है मारते हैं, दुत्कारते हैं और रोने लगता हैं, और दिल ही दिल सोचने लगता हैं, मुजे मर जाना चाहिए मैं ना ही अच्छा पिता बन सका ना अच्छा पति मैं इतने पैसें भी नही कमाता की सब को खुश रख सकूं, हाथ में रस्सी लिए वहाँ मरने के लिए आगे बढ़ता हैं ..........


           चलते_चलते अचानक उसे एक भिखारी साधू मिलता है, उसे रोता देख, साधू उससे पूछता हैं आखिर क्या हुआ हैं, गुब्बारा वाला उसे सब बता देता हैं, 
साधू उससे कहता हैं, अगर तुम्हें एतराज ना हो तो उस सामने वाले नगर तक मेरे साथ चलों, गुब्बारें वाले ने सोचा फिर हाँ कर दी ............

        साधू और गुब्बारा वाला नगर पहुंचे, और एक घर के सामने, पेड़ के नीचे बैठ गयें, साधू ने कहा, बस अब तुम घ्यान से उस घर के पास बैठे कुत्तें और घरवालों की हरकत देखते रहना ............. 

         थोड़ी देर बाद घर का दरवाजा खुला, कुत्ता झट से उठ गया और घर के सामने खड़ा हो गया, अंदर से एक महिला आयी और उसे चार रोटी दिया कुत्ता उसे खाया और फिर वही बैठ गया, 
"""""""फिर कुछ देर बाद एक लड़का निकला, उसने कुत्ते को देख तो पत्थर मारते हुये, कहने लगा अभी रोटी दी है फिर भी यही बैठा हैं, भाग यहाँ से, लड़का चला गया, कुत्ता फिर वही आकर बैठ गया, 
दोपहर हुई, घर की लड़की दरवाजे से अंदर आती हुई, माँ वो माँ इसे खाने नही दिया क्या यही बैठा है ये कुत्ता, महिला गुस्सें में कुत्तें पर पानी डालते हुये कहती हैं, सुबह ही चार रोटी दी, अभी तक नही गया, कुत्ता थोड़ी देर बाद फिर वही बैठ गया .........

          """"__शाम हुई, महिला का पति घर आया, घर आते ही, क्या इस कुत्तें को मुंह लगा रखा हैं, भगाती क्यू नही, और कुत्तें को डंडे से पीटने लगता हैं, कुत्ता थोड़ी देर घूम फिर के फिर वही बैठ गया ........

            साधू ने गुब्बारे वाले से पूछा कुछ समझें, गुब्बारें वाले ने कहा नही महराज कुछ भी नही समझा, वो कुत्ता चार रोटी के लिए बस कितनी मार खाया हैं फिर भी वही बैठा हैं, उसे तो वो घर कब का छोड़ देना चाहिए था, साधू ने हंसते हुये कहा, अब आराम से बैठो और कल सुबह का इंतजार करों .........

          ".........सुबह हुई महिला ने घर का दरवाजा खोला और रात का जितना भी बचा खाना था, सब उस कुत्तें को डाल दिया, कुत्तें ने चाव से खाया और फिर वही बैठ गया,
साधू ने कहा अब कुछ समझें, गुब्बारें वाले ने फिर कहा नही महराज,
साधू ने कहा अब सुनो, वो कुत्ता चार रोटी के लिए, रोज तीन बार मार खाता है, दुत्कारा जाता हैं
फिर भी वो सब्र रखता हैं की मालिक देगा, अभी नही तो सब्र करने पर, चाहें जितनी परीक्षा ले पर वो देगा, चाहे वो मुजे कितनी बार भी पिटवाए पर, उसने जब जीवन दिया हैं तो वो ही पेट भरेगा, इसलिए वो इतनी बार भी मार खाने के बाद भी सब्र रखता हैं, जिसका फल उसे प्राप्त होता हैं ............

          ...."और तुम तो इंसान हो, थोड़ी से कष्ट से घबरा गयें, सब्र रखना सीखों, कर्म करो, वो बैठा है फल देने वाला, वो उठाता तो खाली पेट हैं, पर भरने की जिम्मेदारी कर्म और सब्र पर छोड़ देता हैं, तुम कर्म तो करते हो पर सब्र नही रख पाते, बस मालिक पर विश्वास और सब्र रखों, और घर जाओ, वो देखना, तुम्हारी हर इच्छा पूरी करेगा, बस मेहनत का साथ मत छोड़ना, और सब्र रखना, घर पर तुम्हारे बीवी बच्चें तुम्हारा इंतजार कर रहें, गुब्बारें वाले ने हाथ जोड़ते हुये कहा महराज आपने आज मेरी जिंदगी बचाई और कर्म और सब्र का फल बताया, मैं कभी खुदखुशी की कोशिश नही करूंगा और कर्म के साथ_साथ सब्र भी रखूगां,

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