वेश्या से पत्नी तक हिन्दी कहानी। Hindi Story

वेश्या से पत्नी तक हिन्दी कहानी

हिंदी स्टोरी

आज हम दोनों एक खुशहाल जिंदगी जी रहे हैं। परन्तु ना मैंने आज तक उससे उसके वेश्यावृत्ति के बारे पुछा है और मैं अब पुछना भी नहीं चाहता हूं । मेरे लिए ये कभी मायने नहीं रखता कि लड़की कैसी थी, वर्जिन है कि नहीं है। मायने ये रखता है कि दो दिल और एक रूह मिल रहे हैं। अगर ठीक से याद हो मुझे तो ये सबकुछ करीब 4-4.5 साल पहले शुरू हुआ था । मैं एक इंजीनियरिंग ग्रेजुएट जो ठीक-ठाक पैसे कमा रहे बंदे को उसकी गर्लफ्रेंड छोड़कर चली गई।

 लड़कियों की जिंदगी में एक मोड़ आता है जब लड़के के साथ के अलावा उसे पैसे का साथ भी भाने लगता है । क्यूंकि मुझे पैसे घर भी भेजने होते थे तो मैं अपनी जिम्मेदारियों को समझते हुए पैसों को खर्च कर रहा था । उसने पैसों को ज्यादा तवज्जो दी और मुझे छोड़ दिया । खुबसूरती और चालाकी से लड़की दुनिया का हर सुख और आदमी को अपने वश में कर सकती है । बस फिर क्या शहर के अमीर घराने से उसकी शादी हुई । उसके पति के पास अकूत संपत्ति , अंधाधुंध पैसा है। मानों पैसों का कोई बरगद लगा हो जो पतझड़ के समय में भी करोड़ों रुपए की संपत्ति जमा कर सकता है। 5-6 पेट्रोल पंप ,5 एसयूवी कार , होटल , रेस्टोरेंट्स । मैं उसकी शादी में गया भी था पर जल्द ही लौट आया । फेरों को देखकर लगा मानों मेरे गले में कोई फंदा डाल रहा हो।

 मैंने वहां से अपना फ्लैट बदल लिया , बस फ्लैट बदला था पर दिल कहीं ना कहीं उसके इर्द-गिर्द ही घूम रहा था। मैंने नयी नौकरी ढुंढी , नया माहौल तैयार कर रहा था खुद के लिए ताकि उसके बिना जी सकूं । पर मेरा दिल और दिमाग उससे बाहर जा ही नहीं रहा था , मैं अब सिगरेट और शराब का आदी हो चुका था । आफिस में , आफिस के बाथरूम जब भी मौका मीले एकाथ कश लगा लेता था । मेरी रात अब लेडिज बार , डिस्को , पब में गुजर रहा था । मुझे कुछ भी अंदाजा नहीं था मैं अपनी जिंदगी के साथ क्या कर रहा हूं। अपनी जिंदगी जी रहा हुं या उसने मुझे खैरात में और किराये पर जो दी है वो जी रहा हूं। मैं खुद ब खुद बर्बादी की तरफ़ बढ़ गया था और ना वापस आने का मन था ना ही रास्ता । कोठों पर जाना , वैश्याओं के साथ रात गुजारना ये अब मेरी दिनचर्या में शामिल हो चुका था । घर - परिवार , जिम्मेदारी क्या होती है ? सब कुछ भुल गया । मैं खुद को भी याद रखने में सक्षम नहीं था । कुछ दिनों के बाद एक दलाल के माध्यम से रूम सर्विस शुरू करवा लिया ।

 फ्लैट पर लड़की आती , काम करती पैसा लेती‌ और चलते बनती । एक सुबह देखा काल गर्ल ( वेश्या ) मेरे कमरे को साफ-सुथरा कर रही है , बर्तन को धो रही है , सामानों को सही जगह पर रख रही है । मैं एकदम से हकबका गया , मैं सोच में पड़ गया । ये क्या हो रहा है ? मैं सब कुछ देख जा रहा था , जबान एक दम खामोश । आखिर मैं ने पुछा तुम ये सब क्या रही हो ? जवाब आया - मुझे लगा तुम्हारे कमरों को सफाई की सफाई की सख्त जरूरत है तो मैंने कर दिया। इसके आगे मैं कुछ बोल पाता वो झट से बाहर चली गई। बैठे-बैठे क्या सोचे जा रहा था ? मुझे कुछ अंदाजा नहीं था । मैं उठकर फ्रिज से पानी लेने के लिए किचन में गया,देखा नास्ता बना हुआ है। वो भी आलु के परांठे , मैं बस खड़े हो कर परांठे देखें जा रहा था , दिमाग में बहुत कुछ चल रहा था पर क्या बताऊं ? मैं आफिस गया , काम किया और वापिस आ रहा था अपने फ्लैट।आते समय बार - बार उस लड़की (काल गर्ल) का चेहरा मेरे दिमाग़ में घूम रहा था ।

 मैं रिलायंस फ्रेश के पास अपनी बाइक रोकी, अंदर गया और कुछ स्नैकश लेकर आया । और फ्लैट की तरफ चल दिया । एक अंजान लड़की जिसका शरीर सिर्फ पैसों के नाम पर खुलता है बंद होता है , वो मेरे कमरे को क्यूं सजा रही थी, बर्तन क्यूं धो रही थी और तो और मेरे आफिस जाने से पहले तक मेरे लिए नास्ता तक तैयार कर देती है। फिर बिना बताए चली भी जाती है। आखिर क्यों ? मैं एक दिन अपने दलाल को फोन करता हूं । मैंने दलाल को उसी लड़की को भेजने के लिए कहा । दलाल का थोड़ी देर बाद फोन आया बोला ठीक है साहब मैं भेज रहा हूं। करीब एक घंटे के बाद मेरे दरवाजे का बेल बजा , मैंने दरवाज़ा खोला । चेहरे पर हल्की मुस्कान और गुड मॉर्निंग राज ! मैं ने भी गुड मॉर्निंग कहा । अंदर आने को कहा मैंने । दरवाजे से जैसे-जैसे वो अंदर आ रही थी उसकी मुस्कराहट वैसे-वैसे बढ़ती जा रही थी । आज सेक्स करने का मेरा मन बिल्कुल भी नहीं था,शायद इसीलिए भी कि मैंने पिछले कुछ दिनों से उसके शरीर के बारे में नहीं , उसके मन-मस्तिष्क,सोच और व्यवहार के बारे में सोच रहा था । सोफ़ा लगाया , फ़ोन को दूर फेंका , नेटफ्लिक्स आन किया और उसके पसंद के मुताबिक हार्रर फिल्म चला दी।

 मेरी गोद में उसका सर , मैं उसकी जूल्फों में अपनी उंगलियां फिराये जा रहा हूं। अभी जो मैं और मेरा दिल महसूस कर रहा है,शायद वो सेक्स से बढ़कर है । शायद हम दोनों ही एक दूसरे के लिए कुछ अलग सा चाह रख रहे थे । सामने नेटफ्लिक्स के अलावा भी हम-दोनों के दिल में कुछ चल रहा था । इतना तो अंदाजा था कि हम-दोनों शायद एक-दूसरे के लिए हमदर्दी रखते हैं। बस वो होंठों से, लबों से बाहर आने की देर थी । हम-दोनों ही अंदर-अंदर एक दूसरे को सब बता चुके हैं पर ये बातें जबां तक ना आ पायी । नहीं आयी वो भी अच्छी बात है , वरना हार्रर फिल्म फिर रोमांटिक होने में देर ना लगती । शाम हुई मैंने आनलाईन खाना आर्डर करने जा रहा था , उसने मना कर दिया । कान के पास होंठ रख दी और धीमे दबी ज़बान से - खाना मैं बना देती हूं । मैं बाथरूम चला गया , फ्रेश होकर आया तो किचन की तरफ चल दिया।देखा वो आटा गुंद रही है , सोचा हल्के हाथों से पिछे से उसके कमर को पकड़ लूं फिर रूक गया । मैं चाह रहा था , जो बात दिल में है बो बाहर आ जाये तभी बेहतर है कदम बढ़ाना । खाना खाया और दोनों सोने चले गए। कुछ बातें की इधर उधर की , पुरी रात उसके साथ सोया पर ना मैंने कुछ किया और ना ही उसने पहल की। मैं अब उसके प्यार में था , पूरी तरह से।

 अगली सुबह वही चिज़ दूबारा हुई । वो खाना बना रही थी , घर साफ कर रही थी । खाली पड़ी शराब की बोतलों को बाहर फेंक रही थी ।अब मेरा फ्लैट पहले से ज्यादा अच्छा रहने योग्य बन गया था । पर्दे , बेडशीट को धोबी को दे दिया । इतना सब कुछ करके वो चली गई ,अब कुछ अकेलापन सा महसूस कर रहा था। जैसे दिल खाली-खाली सा लग रहा था। इस बार मैंने उसका नंबर लिख लिया था । मैं कई बार सोचा उसे मैसेज करूं या फिर फोन करूं परन्तु हिम्मत नहीं हुई। आखिरकार एक दिन रविवार को हिम्मत जुटा कर उसे काल किया और पूछा क्या आज तुम्हारे पास समय है ? उसने हां कहा । मैंने उसे फिल्म देखने के लिए बुला लिया । वो आने को तैयार हो गई , पुरा दिन हमने खुब मस्तियां की । हंसी खुशी से गुजरा दिन । उस दिन के बाद से मैं ने कभी उसे एक वेश्या या काल गर्ल की नजर नहीं देखा। मैं उसे दोस्त की तरह रखा । मैं अपने आप में बहुत चिंतित था कि क्या सही है क्या ग़लत है ? ग़लत और सही का पता नहीं पर उसका साथ मुझे भाने लगा था ।

 मुझे में इतना भी साहस नहीं था कि मैं उससे पूछ सकु कि तुमने वेश्यावृत्ति क्यों अपनाया ? पर अब मेरी जिंदगी पहले से ज्यादा खुशहाल थी । लगभग हर रविवार मेरे लिए जन्नत जैसा हो गया था। मिलते थे , खुब सारी बातें,नयी - नयी कहानियां होती थी। अब मैंने सिगरेट और शराब को लगभग छोड़ दिया था , ये सब उसका जादू था जो अब असर दिखा रहा था।हल्की सी भी बातें अब रात - रात तक चलती थी । चैट नहीं चैटें होना शुरू हो गई थी। एक रविवार की शाम हम-दोनों एक पार्क में बैठे थे । उसका सर मेरे कंधे पर था। उसके आंखों में आंसू थे। राज ! मैं ये जिंदगी अब और नहीं जीना चाहती हूं, मैं उस तरह की लड़की नहीं हूं । मैं एक साधारण ज़िंदगी चाहती हुं और जिंदगी में कुछ करना चाहतीं हूं। मेरे भी कुछ सपने हैं , अरमान हैं जिन्हें मैं पुरा करना चाहती हूं। मैं चाहती हूं कि कोई मुझे भी अपनी दिल की गहराइयों से मुझे प्यार करे , मुझे चाहे। अंतिम पंक्ति सुन मुझे धक्का सा लगा । मैं किसी पुराने ख्याल में गुम हो गया । ये बिल्कुल वही पंक्तियां थीं जो कभी गर्ल फ्रेंड ने कही थी। मुझे उस वक्त कुछ समझ नहीं आया कि मैं उसे क्या जवाब दूं ? मैंने उससे बिना कुछ कहे उसे गले लगाया और पुरी शाम वहीं पर बीता दिया। अगले दिन मैंने उसे फ़ोन नहीं किया। उसके मैसेज का जवाब नहीं दे रहा था। उसका फोन नहीं उठा रहा था ।

 करीब-करीब हजारों बार उसने फोन किया होगा मुझे। सच कहूं तो मैं डर गया था कि मुझे फिर से कोई छोड़कर ना चला जाये। क्यूंकि यही बात कहने वाली मेरी गर्लफ्रेंड ने मुझे छोड़ दिया एक अमीरजादे के लिए। मैं ये दू:ख दर्द दूबारा नहीं झेल सकता था और ना अब मुझमें इतनी हिम्मत बची थी। मैं उससे क्या कहूं कुछ समझ नहीं आ रहा था ? क्या बताऊं कुछ सुझ नहीं रहा था । एक हफ्ते बाद वो मेरे घर आयी । वो बहुत ही ज्यादा गुस्से में थी ।राज! तुमने मेरे साथ ऐसा सिर्फ इसलिए किया ना कि क्यूंकि मैं एक वेश्या हुं । मेरी कोई इज्जत नहीं है तुम्हारी नज़रों में इसका ये मतलब तो नहीं ना कि तुम मेरी भावनाओं को ठेस पहुंचाओं । तुम्हें रिश्ता आगे नहीं बढ़ाना था तो कम से कम एक बार बात तो कर सकते थे । हां मैं हुं एक वेश्या मेरी शरीर खेल लो जितना खेलना है लेकिन मेरे सपने, मेरे अरमान को तो मत कुचलो। मैं चुपचाप सब सुनता गया , जब उसका गुस्सा शांत हुआ वो फफक-फफक कर रोने लगी । मैं उसे गले लगाया और माथे पर एक चुम्बन लिया । जब माहौल थोड़ा शांत हुआ, मैंने उसे पुरी बात बताई , कहा मैं फिर से किसी को खोना नहीं चाहता हूं । मैं डर गया था कि तुम्हें भी को ना दूं । करीब दो महीने के बाद उसे लेकर उसके घर गया । उसके मां-पिता से बात की और उन्हें शादी के लिए मनाया । फिर हम-दोनों ने शादी कर लिया ।

 आज हम-दोनों एक खुशहाल जिंदगी जी रहे हैं। परन्तु ना मैंने आज तक उससे उसके वेश्यावृत्ति के बारे पुछा है और मैं अब पुछना भी नहीं चाहता हूं । मेरे लिए ये कभी मायने नहीं रखता कि लड़की कैसी थी, वर्जिन है कि नहीं है। मायने ये रखता है कि दो दिल और एक रूह मिल रहे हैं।

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